हिंदुत्व/अध्यात्म

हिंदुत्व

हिंदुत्व, अनादि काल से चली आ रही जीवन जीने की कला एवं परंपरा है, के अनंत आयामों को छूकर आंदोलित करने का सार्थक प्रयास किया जा सकता है.

अध्यात्म

अध्यात्म विचारों की परिष्कृतता है, जो मनुष्य के रहस्यमयी गुणों को उजागर करते हुए जीवन एवं जीवन की अच्छी-बुरी घटनाओं से सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास करता है. इस साधन के अनवरत अभ्यास से मनुष्य परम शक्ति से सायुज्य स्थापित कर सकता है.आध्यात्मिक जगत भौतिक जगत से भिन्न है। हम शरीर नहीं हैं, यह अनुभूति ही आध्यात्मिकता का प्रथम चरण है। जीवन में उपाधियों की आकांक्षा, भौतिकता में आसक्तियां एवं प्रकृति में प्रभुत्व की चाह आध्यात्मिकता की राह को कठिन बना देती है। संपूर्ण शरणागति ही इसकी प्रथम अवस्था है। गीता में आध्यात्मिकता की व्याख्या इस प्रकार की गई है,

निर्मानमोहा जितसंगदोषाअध्यात्मनित्या विनिवृत्तकामाः।

द्वंद्वैर्विमुक्ताः सुख-दुःखसंज्ञैर्गच्छन्त्यमूढ़ाः पदमव्ययं तत्।। गीता १५/५

अर्थात् जिनका मान और मोह नष्ट हो गया है, जिन्होंने आसक्ति रूप दोष को जीत लिया है, जिनकी परमात्मा के स्वरूप में नित्य स्थिति है और जिनकी कामनाएं पूर्ण रूप से नष्ट हो गई हैं- वह सुख-दुख नामक द्वन्द्वों से विमुक्त ज्ञानी जन उस अविनाशी परम पद को प्राप्त होते हैं।

पारंपरिक प्रथाओं के प्रचलन को मूर्त रूप देने से पहले, सहज मानव स्वभाव के कारण,उसकी वैज्ञानिकता, उपयोगिता एवं सार्थकता का परीक्षण अति आवश्यक है, क्योंकि यह उपयुक्त विषय पर विचार करने, विचार रखने और एक आधार युक्त निर्णय पर पहुंचने के लिए यह एक सूक्ष्म प्रयास किया जा रहा है।

जीवन की उहापोह में व्यक्ति कुछ क्षण भगवत भजन, भक्ति के लिए नहीं निकाल पा रहा है जिज्ञासु प्रवृत्ति होने के कारण धार्मिक क्रियाकलापों के लिए सर्वप्रथम ‘ऐसाक्यों?’ यह विचार मन में आता है। इन सभी जिज्ञासाओं के लिए हम लेकरआ रहे हैं वैज्ञानिक तरीके से संशोधित धार्मिकज्ञान, जो निश्चित ही जिज्ञासु प्रवृत्ति के मनुष्यों के लिए कारगर सिद्ध होगी। मनुष्य के जन्म से मरण तक के अंतराल में अनेक घटनाएं होती रहती हैं उन घटनाओं, समस्याओं का समाधान पूरी कोशिश करने के उपरांत भी नहीं हो पाता इसका हल वैदिक परंपरा से चली आर ही वैज्ञानिक ज्ञान से ढूंढना श्रेयस्कर है।