भक्तों के हनुमान: बाबा नीब करौरी जी

कई वर्ष पूर्व एक रहस्मयी घटना घटित होती है, कई दिनों का भूखा-प्यासा लगभग २९ वर्षीय साधु एक ट्रैन में चढ़ जाता है, टी-टी ट्रैन में पहुंचकर यह पाता है कि साधु बेटिकेट फर्स्ट क्लास बोगी में यात्रा कर रहा है। टी टी का पारा चढ़ता है, वह ट्रैन रुकवाता है और साधु को अपशब्द कह बोगी से बाहर निकाल देता है। वह साधु मदमस्त होकर, नंगे पाँव पैदल ही ट्रैन की दिशा में चलने लगता है। लेकिन जैसे ही ट्रैन को चलने का संकेत मिलता है, ट्रैन के पहिए घूमते ही नहीं है, कई तकनीशियन और इंजीनियर निरीक्षण के उपरान्त कोई दोष नहीं पाते हैं। टीटी को पूर्व में घटित घटना का स्मरण हो उठता है, वह भागकर साधु को क्षमा-याचना कर वापस लेकर सादर ट्रैन में बिठाते हैं, ट्रैन चल पड़ती है। बाबाजी की सशर्त ट्रैन में बैठने की वजह थी, गाँव नीब करौरी का रेलवे हाल्ट, जहाँ आज भी ट्रैन रूकती है, यहीं से उन्हें बाबा नीब करौरी नाम मिला। यह असाधारण घटना थी, जिसने बाबाजी को उनके भक्तों तक पहुँचाया।

वर्ष १९०० में अकबरपुर, फिरोजाबाद जिले, उत्तर प्रदेश में रह रहे एक ब्राह्मण परिवार दुर्गा प्रसाद शर्मा के घर में लक्ष्मी नारायण शर्मा के रूप में आपने जन्म लिया। मात्र ११ वर्ष की अवस्था में विवाह बन्धन में बधने के बाद, नीब करौरी बाबा एक साधु बन, भारत में भ्रमण करते रहे और तपस्या के बाद एक संत बन गए। लेकिन कालान्तर में वह अपने पिता के अनुग्रह पर घर लौटे और गृहस्थ आश्रम स्वीकार किया, जिससे उन्हें दो पुत्र और एक पुत्री हुए। अन्ततः आप पुनः सन्यास लेकर घर से निकल गए।

बाबा नीब करौरी जी के कई भक्तों ने यह स्वीकार किया कि बाबा जी रहस्मयी तरीके से अपने चुनिंदा भक्तों को जांचते रहते थे, कभी वह उनके हृदय में संदेह पैदा कर देते, तो कभी कठिन पारिवारिक या सांसारिक परिस्थितियों में डालकर उन्हें जांचते। कभी तो भक्त की भक्ति की परीक्षा ले लेते, तो कभी व्यक्ति को अपने चमत्कारों से दिग्भ्रमित कर देते। बाबाजी भक्त को कभी तो भाव शून्य ही कर देते। फिर तत्क्षण, भक्त को आशीर्वाद देते, उन्हें भक्ति के लिए प्रेरित करते रहते। वह विश्वास जगाते कि ‘मुझे मन में रखो, मैं तुम्हारे पास ही हूँ। सब मेरी संतान हैं, मैं सबका हूँ।’

बाबाजी जिन्हें कुछ भक्त महाराज जी कहकर सम्बोधित करते रहे हैं, ने कभी भी भक्तों को लम्बे-चौड़े उपदेश नहीं दिए, बल्कि उन्होंने भक्त बनाये। वह भक्तों को हृदय से भक्ति करने के लिए प्रेरित करते हैं। राम शब्द से उनका लगाव रहा, उन्होंने भक्तों को स्नेह, सेवा, सत्य बोलने और हर क्षण प्रभु का स्मरण करने का सन्देश दिया है। श्रृद्धालुओं व भक्तों को भोजन कराने के लिए वह सदा खड़े रहते, उनका स्नेह सभी धर्मों के भक्तों को मिला है, इसलिए उनके भक्तों में विदेशी श्रृद्धालुओं का नाम जुड़ा हुआ है। रामदास, भगवान दास व जूलिया रॉबर्ट्स उनकी भक्त हैं, एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स व फेसबुक के संस्थापक मार्क जकरबर्ग ने बाबाजी की प्रेरणा से ही, उनके समाधी लेने के बाद, कैंची स्थित उनके मंदिर-धाम के दर्शन किए।

भक्तों के लिए बाबाजी कभी कठोर हृदय हो जाते, कभी बालक बन जाते हैं। अपने भक्तों को वह स्वप्न में भी मार्गदर्शन देते रहे हैं, वह भक्त के भीतर आत्मविश्वास जगाते हैं, उसे नई दिशा और सोच देते हैं, उसे अध्यात्म की ओर मोड़ देते हैं। वह हर भक्त की आत्मा में बसे हुए हैं, भक्त पुकारते हैं, वह दौड़े चले आते हैं।

कई भक्तों ने उन्हें हनुमान जी का साक्षात् अवतार होने का दावा किया है। वह भक्तों को हनुमान चालीसा व सुन्दरकाण्ड का पाठ करने
की सलाह देते रहे। उनका स्थूल शरीर भले ही समाधिस्थ हो, मगर वह भक्तों के लिए साक्षात् हनुमान हैं।

सतत जारी

राम राम राम

जय गुरुदेव बाबा नीब करौरी जी महाराज

लेखनः श्री रवि जोशी